नव वर्ष पर कविता 2023— New Year Poem in Hindi and English

Happy New Year 2023 – नया साल बस आने ही वाला है और हर कोई इसे बड़ी धूम धाम से मनाने की सोच रहा है | कोई कहीं घूमने की प्लानिंग बना रहा है तो कोई अपने दोस्तों के साथ पार्टी के लिए प्लान बना रहा है | नए साल पर हर कोई कुछ अलग और अच्छा करने की सोचता है क्यूंकि लोगो का ऐसा मानना है की नए साल का पहला दिन अगर अच्छे से गुज़रेगा तो आने वाले दिन भी उसी तरह से जाएंगे | नए साल वाले दिन स्कूल व कॉलेज में भी अलग-अलग तरह के प्रोग्राम बच्चों व टीचर्स के लिए आयोजित किये जाते हैं | आइये जानते हैं नए साल से जुडी कुछ कविताओं के बारे में |

नव वर्ष पर हास्य कविता

इस साल हमने बहुत सोचा विचारा यहाँ तक कि अपना सर तक दीवार पे दे मारा बहुतों से पूछा बहुतों ने बताया फिर भी यह रहस्य समझ में नहीं आया कि कल और आज में अंतर क्या है आख़िर इस नए साल में क्या नया है वही रोज़ की मारामारी जीवन जीने की लाचारी बढ़ती हुई महँगाई सरकार की सफ़ाई राशन की लाइन ट्रैफ़िक का फाइन गृहस्थी की किचकिच आफ़िस की खिचखिच सड़कों के गढ्ढे नेताओं के फड्डे लेफ्ट की चाल बेटी की ससुराल मुर्गी या अंडा अमरीका का फंडा खून का स्वाद धर्म का उन्माद एक सा अख़बार फिर मर गए चार राष्ट्रगान का अपमान मेरा भारत महान आज भी है वही जूता लात न हम बदले हैं न हालात सिर्फ़ सफ़ेद हो गए चार बाल क्या इस लिए मनाएँ नया साल अभी हमारा मन इस चक्कर से नहीं था निकल पाया तभी हमारा बेटा हमारे पास आया बोला पापा क्या आप इस साल भी रोज़ आफ़िस से लेट आओगे हमारे साथ बिल्कुल टाइम नहीं बिताओगे और आ के सारा टाइम सिर्फ़ टीवी निहारोगे आफ़िस का सारा गुस्सा भी घर पर उतारोगे सच कहूँ जो साथ ले के चलते हैं दुनिया के ग़म उनकी उम्र हो जाती है दस साल कम क्या फ़र्क पड़ता है कि क्या होगा कल खुश रहो आज जियो हर पल जानते हैं मैंने ये पिटारा क्यों खोला है क्योंकि चार दिन हो गए आपने मुझे अभी तक हैप्पी न्यू इयर नहीं बोला है तब हमें ये समझ में आया कि कुछ बदलने के लिए हर पल मनाना बहुत ज़रूरी है और हर खुशी बिना अपनों के साथ के अधूरी है सो इस लिए आप को विश करता हूँ डियर नव वर्ष की शुभकामनाएँ हैप्पी न्यू इयर।

आप खुशियाँ मनाएँ नए साल में बस हँसे, मुस्कुराएँ नए साल में गीत गाते रहें, गुनगुनाते रहें हैं ये शुभ-कामनाएं नए साल में रेत, मिटटी के घर में बहुत रह लिए घर दिलों में बनायें नए साल में अब न बातें दिलों की दिलों में रहें कुछ सुने, कुछ सुनाएँ नए साल में जान देते हैं जो देश के वास्ते गीत उनके ही गायें नए साल में भूल हमको गए हैं जो पिछले बरस हम उन्हें याद आयें नए साल में

नये वर्ष की नयी सुबह नयी कलम और नयी डायरी काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि मुग्ध हो जाएँ दुनिया सारी खामोश जुबां के शब्द बनूं टूटे सपनो के टुकड़े चुनूं काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि भटके अपनो की राह बुनूं दीन-दुखी जन की पीड़ा हर दिल तक पहुँचा पाऊँ काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि सबके दिल को छू जाऊँ निर्बल का मान बचा पाऊँ निर्धन की जान बचा पाऊँ काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि हर दिल को रोशन कर जाऊँ जंग लगे दिल के दरवाजों के तालों को तोड़ सकूँ काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि सबके दिलों को जोड़ सकूँ झूठ का पर्दाफाश करूँ और सच का मैं आगाज़ करूँ काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि सबके दिलों में राज करूँ प्रकाश की सविता बन जाऊँ आस की सरिता बन आऊँ काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि खुद ही कविता बन जाऊँ

Poems funny

On New Year’s Day a year ago, I started off the year by making resolutions that were probably severe. I said I’d save my money, as this seemed so very wise. I vowed I would improve my health. I swore I’d exercise. I stated I would do my homework every single day. I’d brush my teeth religiously to ward off tooth decay. I’d eat my fruits and vegetables and keep my bedroom clean. I’d treat my sister kindly though she’s often very mean. My resolutions lasted me about a half a day. I promised I would keep them but I broke them anyway. So now I’m fat and penniless. My homework’s overdue. My sister’s mad. My teeth are bad. My room is messy too. And yet I think I may have found the best of all solutions, and this year I’ve resolved to not make ANY resolutions

My New Year Solutions, Not Resolutions This year I want to be a monkey Jumping from tree to tree Next year I can be a donkey Braying from sky to sea. Every year I want to change And experience something new I wish I am something strange Like the disappearing dew. I want to feel the life of a lion king Sitting inside its majestic skin Turning into a peacock I will sing And be a cuckoopea Siamese twin Why can’t I be a bubble? Blow away and disappear Instead of getting into trouble Making resolutions every year.

New year poems short

नए वर्ष में नई पहल हो। कठिन ज़िंदगी और सरल हो।। अनसुलझी जो रही पहेली। अब शायद उसका भी हल हो।। जो चलता है वक्त देखकर। आगे जाकर वही सफल हो।। नए वर्ष का उगता सूरज। सबके लिए सुनहरा पल हो।। समय हमारा साथ सदा दे। कुछ ऐसी आगे हलचल हो।। सुख के चौक पुरें हर द्वारे। सुखमय आँगन का हर पल हो।।

नव वर्ष हर्ष नव जीवन उत्कर्ष नव नव उमंग नव तरंग जीवन का नव प्रसंगनवल चाह नवल राह जीवन का नव प्रवाहगीत नवल प्रीति नवल जीवन की रीति नवल जीवन की नीति नवल जीवन की जीत नवल

Famous new year poems

नये वर्ष का करें सभी हम, मिलकर सारे ऐसा स्वागत, भूल सारे वैर भाव हम, मन में हो प्रीती की चाहत. नहीं किसी का बुरा करें हम, सीखें मानवता से रहना, सच्ची -मीठी वाणी बोलें, कटुवचन न कभी कहना! नये -नए संकल्प करें हम अब है आगे हमको बढ़ना, भूखे -प्यासे दीन -दुखी की , आगे बढ़ कर सेवा करना. सबके लिए हो मंगलमय इस, नए वर्ष का इक -इक पल, भविष्य स्वर्णिम और सुखद हो, सबके लिए हो उज्जवल कल.

जिन्दगी का एक ओर वर्ष कम हो चला, कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला.. कुछ ख्वाईशैं दिल मे रह जाती हैं.. कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं .. कुछ छोड़ कर चले गये.. कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर मे .. कुछ मुझसे बहुत खफा हैं.. कुछ मुझसे बहुत खुश हैं.. कुछ मुझे मिल के भूल गये.. कुछ मुझे आज भी याद करते हैं.. कुछ शायद अनजान हैं.. कुछ बहुत परेशान हैं.. कुछ को मेरा इंतजार हैं .. कुछ का मुझे इंतजार है.. कुछ सही है कुछ गलत भी है. कोई गलती तो माफ कीजिये और कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये।

Inspirational poems

सर्द रातों की एक हवा जागी और बर्फ़ की चादर ओढ़ सुबह के दरवाज़े पर दस्तक दी उसने उनींदी आँखों से सुबह की अंगड़ाई में भीगी ज़मीन से ज्यों फूटा एक नया कोपल नए जीवन और नई उमंग नई खुशियों के संग दफ़ना कर कई काली रातों को झिलमिलाते किरनों में भीगता नई आशाओं की छाँव में नए सपनों का संसार बसाने बर्फ़ीली रात की अंगड़ाई के साथ बसंत के आने की उम्मीद लिए आज सब पीछे छोड़ चला वो अपनाने नए आकाश को नए सुबह की नई धूप में नई आशाओं की नई किरन के संग आज फिर आया है नया साल पीछे छोड़ जाने को परछाइयाँ

Kab tak phool barsenge naye saal par, Yeh bhi ho jayega ek din purana, Jayenge sookh yeh saare phool, Iske ant ka karega intezar zamana Door ho jayegi sabhi duvidhayen, Naye saal mein hoga naya savera, Nav-varsh lagta atyant bharosemand, Jhooti ummeeden ban jaati sahara Purana hoga jab yeh naya saal, Ho jayegi ummeed ki kiran ojal, Dhoka de gaya yeh saal bhi, Aao kare iska bhi qatal, Naye saal mein kya hai nayapan, Hai to keval tarikh mein badal, Vijay prapt ho saal ke har din, Paida kar utna aatmabal

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